मंगलवार, 28 जुलाई 2009




मोहब्बत !!

मोहब्बत क्या है ये अब तक मै जान ना पाया

दीवानगी कभी पागलपन है बतलाया !!

कोई कहता मोहब्बत नाम हर दम साँथ रहने का !

जो बाँटे हर खुशी मिलके हर गम साँथ सहने का !!

चले हर राह तेरे साँथ जैसे हो तेरा सायाँ !

मोहब्बत क्या लैला और मजनू की कहानी मे !

या मुमताज की यादों भरी इस निशानी मे !!

के है जो हीर और रांझे के किस्सों मे पाया !

मोहब्बत नाम अपने प्यार पर सब कुछ लुटाने का !

ना हो अफ़सोस खातिर यार के सब कुछ गवाने का !!

रहे वो दूर जितना और मन के पास ही आया !

ये वो अहसास जो रिश्तों मे बंध कर रह नही सकता !

करे महसूस ना कोई ख़ुद है क्या कह नही सकता !!

समझ आया न बिन जाने ज़माने भर ने समझाया !

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें