मंगलवार, 28 जुलाई 2009

प्रथम प्रेम !!
मेरी प्रेरणा मेरी कल्पना ,
मेरा हर्दय श्रंगार तुम !
मेरे प्रेम रूपी पुष्प पे ,
सावन की पहली फुहार तुम !!
निर्मल तेरा ये रूप है ,
तू शीत पावन धुप है !
गंगा पवित्र ये मन तेरा ,
हर बात तेरी अनूप है !
हर मन प्रफुल्लित हो उठे ,
शब्दों की वो बोछार तुम !!
आँखों से चंचल हिरणी ,
तू जब चले तो मोरनी !
मुस्कान मे मोती झरे ,
मेरा दिल चुराया चोरनी !
मेरी प्रेम परिभाषा हो तुम ,
मेरा प्रथम इजहार तुम !!
यादों मे मेरी तुम बसी ,
हर कल्पना मे तुम रची !
सब ख्वाब तुम से जुड़ गए,
धड़कन भी मेरी ना बची !
मन मे बसी तेरी मूरती,
पूजा मेरी मेरा प्यार तुम !!
मेरी प्रेरणा मेरी कल्पना ,
मेरा हर्दय श्रंगार तुम !

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