मंगलवार, 28 जुलाई 2009

बहुत हुआ अब घर जाना है !
खोये अपने उन सपनों को पाना है !!
छुटे हाथ झलकती आँखे,
सिसकी भर भर चलती सांसे !
पोंछने फिर पलक के आंसू,
अपने हाथ बड़ाना है !!
छोड़ी गलियाँ वो चौपाले,
छत पे मंडली डेरा डाले !
शाम सुनहरी फिर करदे वो,
महफ़िल यार सजाना है !!
प्यार से मिलते संगी साँथी,
सिर्फ़ प्रेम की भाषा आती !
बोल जो मीठे भूल चुका मै,
फिर होंठो पे लाना है !!
वक्त नही अपनों के खातिर,
समय चाल समझा ना शातिर !
पास रहे जो बचे हुए पल,
अपनों संग बीताना है !!
सब कुछ है पर मन है खाली,
बेरंग होली सूनी दीवाली !
अबके दीवाली दीप जलाऊँ,
होली रंग उड़ाना है !!
फ़िर अपनों के संग रहूँगा,
मन का हर एक दर्द कहूँगा !
मिला नही बरसों से जो,
खोया प्यार पाना है !!

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