VARUN DEV
मंगलवार, 28 जुलाई 2009
मेरे मन की सरिता क्यों वहती तुम !
ना जाने क्या क्या सहती हो तुम !
मै भी तेरे साथ साथ वाहता हु
तेरे लीये हर कुछ सहता हु !
तू नदी
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें