मंगलवार, 28 जुलाई 2009

तन्हा मन
एक भोला मन प्यारी आँखे जाने किसको ढूंड रही !
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!
है नादाँ सी कभी कभी ,
और भोली लगती हर दम है !
पर मन मे तूफान भरा है ,
पड़ती किसी से ना कम है !
करना है दुनिया को बस मे ,
सीखना है हर बात नयी !!
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!
मुस्काता सा चहरा इसका ,
आंखे झील समाई है !
हे मन से भी सुंदर उतनी ,
ये परी जमी पे आई है !
शब्द ख़तम हो पर बचजाये ,
इसकी खूबी कई कई !!
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!

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