मंगलवार, 28 जुलाई 2009

मेरे मन की सरिता क्यों वहती तुम !
ना जाने क्या क्या सहती हो तुम !
मै भी तेरे साथ साथ वाहता हु
तेरे लीये हर कुछ सहता हु !
तू नदी



मोहब्बत !!

मोहब्बत क्या है ये अब तक मै जान ना पाया

दीवानगी कभी पागलपन है बतलाया !!

कोई कहता मोहब्बत नाम हर दम साँथ रहने का !

जो बाँटे हर खुशी मिलके हर गम साँथ सहने का !!

चले हर राह तेरे साँथ जैसे हो तेरा सायाँ !

मोहब्बत क्या लैला और मजनू की कहानी मे !

या मुमताज की यादों भरी इस निशानी मे !!

के है जो हीर और रांझे के किस्सों मे पाया !

मोहब्बत नाम अपने प्यार पर सब कुछ लुटाने का !

ना हो अफ़सोस खातिर यार के सब कुछ गवाने का !!

रहे वो दूर जितना और मन के पास ही आया !

ये वो अहसास जो रिश्तों मे बंध कर रह नही सकता !

करे महसूस ना कोई ख़ुद है क्या कह नही सकता !!

समझ आया न बिन जाने ज़माने भर ने समझाया !
बहुत हुआ अब घर जाना है !
खोये अपने उन सपनों को पाना है !!
छुटे हाथ झलकती आँखे,
सिसकी भर भर चलती सांसे !
पोंछने फिर पलक के आंसू,
अपने हाथ बड़ाना है !!
छोड़ी गलियाँ वो चौपाले,
छत पे मंडली डेरा डाले !
शाम सुनहरी फिर करदे वो,
महफ़िल यार सजाना है !!
प्यार से मिलते संगी साँथी,
सिर्फ़ प्रेम की भाषा आती !
बोल जो मीठे भूल चुका मै,
फिर होंठो पे लाना है !!
वक्त नही अपनों के खातिर,
समय चाल समझा ना शातिर !
पास रहे जो बचे हुए पल,
अपनों संग बीताना है !!
सब कुछ है पर मन है खाली,
बेरंग होली सूनी दीवाली !
अबके दीवाली दीप जलाऊँ,
होली रंग उड़ाना है !!
फ़िर अपनों के संग रहूँगा,
मन का हर एक दर्द कहूँगा !
मिला नही बरसों से जो,
खोया प्यार पाना है !!
तन्हा मन
एक भोला मन प्यारी आँखे जाने किसको ढूंड रही !
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!
है नादाँ सी कभी कभी ,
और भोली लगती हर दम है !
पर मन मे तूफान भरा है ,
पड़ती किसी से ना कम है !
करना है दुनिया को बस मे ,
सीखना है हर बात नयी !!
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!
मुस्काता सा चहरा इसका ,
आंखे झील समाई है !
हे मन से भी सुंदर उतनी ,
ये परी जमी पे आई है !
शब्द ख़तम हो पर बचजाये ,
इसकी खूबी कई कई !!
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!

विजय शिखर !!
बहुत सी आस ले ये मन चला पाने शिखर,

मगर दिल मे है जाने कौन सा अंजाना डर !

कही आंधी न आजाये न खा जाऊँ मै ठोकर ,

समय है कम सफर लंबा बचे है कुछ पहर!

बहुत से हाथ मेरे हाथ को थामे हुए है ,

बहुत से लोग मुझ को अपना सा माने हुए है !

कई रिश्तों की जंजीरे मेरे पैरो मे है ,

कई अनजाने मुझ को दोस्त सा जाने हुए है !

मगर फिर भी है सूनापन मन मे कही,

साँथ काफिला पर लगे तनहा सफर !!

कई छोटे बड़े ख्वाब आँखो मे बसते,

कई अरमान मेरे मन मे रोज सजते !

कई उम्मीद के घरोंदे बन गए है ,

न पाई खुशी के सुर कानो मे बजते !

मगर अंजाना सा डर मन मे है ,

न जाने कौन होगा इस सफर मे हमसफ़र !!

है हर बात का अहसास पर जारी सफर,

न चिंता आए कोई भी मुश्किल अगर !

न जाने कौन सी ताकत है ये मन लिए ,

न लगता कोई भी बाधा से इसको डर !

है बस आस की पूरी हो मांगी दुआ जो ,

मिले जो चाहे कुछ पाना विजय शिखर !!
प्रथम प्रेम !!
मेरी प्रेरणा मेरी कल्पना ,
मेरा हर्दय श्रंगार तुम !
मेरे प्रेम रूपी पुष्प पे ,
सावन की पहली फुहार तुम !!
निर्मल तेरा ये रूप है ,
तू शीत पावन धुप है !
गंगा पवित्र ये मन तेरा ,
हर बात तेरी अनूप है !
हर मन प्रफुल्लित हो उठे ,
शब्दों की वो बोछार तुम !!
आँखों से चंचल हिरणी ,
तू जब चले तो मोरनी !
मुस्कान मे मोती झरे ,
मेरा दिल चुराया चोरनी !
मेरी प्रेम परिभाषा हो तुम ,
मेरा प्रथम इजहार तुम !!
यादों मे मेरी तुम बसी ,
हर कल्पना मे तुम रची !
सब ख्वाब तुम से जुड़ गए,
धड़कन भी मेरी ना बची !
मन मे बसी तेरी मूरती,
पूजा मेरी मेरा प्यार तुम !!
मेरी प्रेरणा मेरी कल्पना ,
मेरा हर्दय श्रंगार तुम !

sarita

मन सरीता !!
अंश अपने मन का कर तुझको को समर्पित !
लिख रहा तेरे लिए मन की सरीता !!
है बहुत लिखना मगर शब्द कम है !
भावना के बोल और मन की कलम है !!
अपने मन मे जो तेरी मूरत बसाई !
वो नही मिटती किसी से भी मिटाई !!
तुम ही मेरे मन की हो पहली करीता !
जब अकेला था जीवन डगर मे !
मित्र बन चलदी संग तुम सफर मे !!
क्या हूँ मै मुझको तुमने बताया !
और जब भटका कही तुमने बचाया !!
जान पाया तुमसे ही क्या है वनीता !
जो मिला तुमसे तेरा उपकार समझूँ !
जो मिले तुमसे तुम्हारा प्यार समझूँ !!
चाँहू सब लौटाना इस जीवन सफर मे !
हाथ तेरा थाँमू हर मुश्किल डगर मे !!
है दुआ तुम रहो हर दम सस्मिता !
लिख रहा तेरे लिए मन की सरीता
deityn देव
elfn देव
giantnदेव
monsternदेव
adityanसूर्य देव
amornयूनानी पौराणिक कथाओं में प्रेम का देवता
anunबेबिलोन सभ्यता में गगन देवता
brahmanहिंदू धर्म में एक देवता
brother in-lawn(husband's small brother) देवर
demi-godnगौण देवता
floranबन देवी

रविवार, 26 जुलाई 2009

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